- भारत और ईरान ने नाविकों (1978) के लिये प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी मानकों (STCW) पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय के प्रावधानों के अनुसार दोनों देशों के नाविकों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है।
- यह समुद्र में जाने वाले व्यापारी जहाज़ों पर स्वामी, अधिकारियों और निगरानी कर्मियों के लिये योग्यता मानक निर्धारित करता है।
- STCW को वर्ष 1978 में लंदन में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) में एक अभिसमय द्वारा अपनाया गया था और यह वर्ष 1984 में लागू हुआ था।
- वर्ष 1995 मेंं अभिसमय में व्यापक स्तर पर संशोधन किया गया था।
- वर्ष 1978 का STCW अभिसमय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाविकों के लिये प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी पर बुनियादी आवश्यकताओं को स्थापित करने वाला पहला था।
- यह नाविकों के लिये प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी से संबंधित न्यूनतम मानकों को निर्धारित करता है जिन्हें पूरा करने या उससे अधिक करने के लिये देश बाध्य हैं।
- अभिसमय की एक विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह गैर-पार्टी राज्यों के जहाज़ों पर लागू होता है, जब वे उन राज्यों के बंदरगाहों पर जाते हैं जोअभिसमय के पक्षकार हैं।
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