- ऑक्सफैम इंडिया द्वारा जारी की गई इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट ने इस संदर्भ पर प्रकाश डाला कि महिलाओं और हाशिये के समुदायों को नौकरी में भेदभाव का सामना करना पड़ा।
- यह डेटासेट रोज़गार-बेरोज़गारी पर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (2004-05), वर्ष 2018-19 और 2019-20 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey-PLFS) एवं केंद्र द्वारा अखिल भारतीय ऋण तथा निवेश सर्वेक्षण के 61वें दौर से लिया गया था।
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति: शिक्षा और सहायक सरकारी नीतियों के कारण शहरी क्षेत्रों में भेदभाव में कमी आई है।
- आय में अंतर: गैर-अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के लिये वर्ष 2019-20 में स्व-नियोजित श्रमिकों की औसत आय 15,878 रुपए, जबकि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि के लोगों की औसत आय 10,533 रुपए थी।
- स्व-नियोजित गैर-अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के कर्मचारी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि के अपने समकक्षों की तुलना में एक-तिहाई अधिक कमाते हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में भेदभाव में वृद्धि: ग्रामीण भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों को आकस्मिक रोज़गार में भेदभाव में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है।
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