- आर्कटिक क्षेत्र में भारत के पहले शीतकालीन विज्ञान अभियान को पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू ने हरी झंडी दिखाई।
- चार वैज्ञानिकों की एक टीम ने ब्रोगर प्रायद्वीप पर न्यालेसुंड शहर में भारत के अनुसंधान केंद्र की यात्रा शुरू की।
- अथुल्या आर, गिरीश बी एस, प्रशांत रावत और सुरेंद्र सिंह इस टीम के सदस्य हैं।
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) आवश्यक बजटीय और अन्य आवंटन करेगा।
- वैज्ञानिकों की टीम 30 दिनों तक नायालेसुंड के रिसर्च स्टेशन पर रहेगी।
- अब, भारत की आर्कटिक क्षेत्र में अनुसंधान स्टेशन पर साल भर मौजूदगी रहेगी।
- भारत ने 2007 में अपना आर्कटिक अनुसंधान कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन है।
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