- हरिवंश लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के पद पर निर्विरोध चुने गए हैं।
- यह एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि वे इस पद को संभालने वाले पहले मनोनीत सदस्य बन गए हैं।
- यह चुनाव विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति और संसदीय कार्यप्रणाली में उनके अनुभव की स्वीकार्यता को दर्शाता है।
- हरिवंश का इस पद पर दोबारा चुनाव बिना किसी विरोधी उम्मीदवार के हुआ, जो विभिन्न दलों से उन्हें मिले मज़बूत समर्थन का संकेत है। उनके चुनाव का प्रस्ताव जे.पी. नड्डा ने पेश किया, जो राज्यसभा में सदन के नेता हैं।
- उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो गया था, जिससे यह पद रिक्त हो गया था; अब इस रिक्ति को बिना किसी बाधा के भर दिया गया है।
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