अगस्थ्यमलाई में अतिक्रमण हटाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश


  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अगस्थ्यमलाई क्षेत्र में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को गंभीरता से लेते हुए 30 मई 2026 को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। 
  • न्यायालय ने तमिलनाडु और केरल सरकारों को संरक्षित वन क्षेत्रों से सभी अवैध कब्जों और अनधिकृत ढांचों को हटाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया है। 
  • यह क्षेत्र Agasthyamalai Biosphere Reserve का हिस्सा है और जैव विविधता तथा वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वन क्षेत्रों के भीतर बिना अनुमति बनाए गए रिसॉर्ट, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सरकारी सुविधाएं और अन्य संरचनाएं कानून के अनुरूप नहीं हैं और इनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। 
  • न्यायालय के निर्देश विशेष रूप से Srivilliputhur-Megamalai Tiger Reserve और Megamalai Wildlife Sanctuary से संबंधित हैं, जहां बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की शिकायतें सामने आई हैं।
  • केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीविल्लीपुथुर-मेघामलाई टाइगर रिजर्व में 5,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर 4,600 से ज्यादा अतिक्रमणकारी कब्जा किए हुए हैं। 
  • रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि क्षेत्र में 116 सरकारी और सार्वजनिक उपयोगिता संबंधी ढांचे आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के बिना निर्मित किए गए हैं। 
  • सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वन संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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