- मेघालय की प्रसिद्ध लाकाडोंग हल्दी को खेती, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात से जोड़कर वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से केंद्र और मेघालय सरकार ने ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ की शुरुआत की है।
- 21 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में लॉन्च की गई यह पांच वर्षीय परियोजना वर्ष 2026–2030 तक संचालित होगी, जिसके लिए 175.45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
- लाकाडोंग हल्दी अपनी उच्च कर्क्यूमिन (7–12%) मात्रा के कारण विश्वभर में विशेष पहचान रखती है, जबकि सामान्य हल्दी में यह मात्रा लगभग 2–4% होती है।
- अधिक कर्क्यूमिन होने के कारण इसे औषधीय गुणों, बेहतर गुणवत्ता और प्रीमियम बाजार में अधिक मांग वाली हल्दी माना जाता है।
- लाकाडोंग हल्दी को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त है, जो इसकी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति, मौलिकता और बाजार में अलग पहचान को प्रमाणित करता है।
- यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय मसालों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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