प्रतिदिन 10 प्रश्न और उत्तर (Q & A),(19-07-2022)

प्रश्न-


1. ओजोन परत में छिद्र का मुख्य कारण है?
(a) क्लोरोफ्लोरोकार्बन (b) लेडटेट्रा एल्किल्स
(c) प्रकाश (d) मेटल कार्बोनिल्स

2. मछलियों में सामान्यत: श्वसन होता है -
(a) त्वचा द्वारा (b) नाक द्वारा
(c) गलफड़ों द्वारा (d) फिन्स द्वारा

3. डायनासोर का स्वर्णयुग था
(a) आर्किओजोइक (b) सीनोजोइक
(c) मेसोजोइक (d) पैलियोजोइक

4. पसीने का मुख्य उपयोग है─
(a) शरीर का ताप नियन्त्रित रखने में
(b) शरीर में जल की मात्रा सन्तुलित रखने में
(c) शरीर के विष पदार्थ निकालने में
(d) त्वचा के छिद्र से गन्दगी दूर रखने में

5. `परितृप्ति' एवं `प्यास' के केंद्र मानव मस्तिष्क के निम्नलिखित में से किस भाग में अवस्थित है?
(a) अग्र मस्तिष्क में (b) हाइपोथैलेमस में
(म्) मेड्यूला में (d) ऑप्टिक  लोब में

6. किस पशु के अवशेष सिन्धु घाटी सभ्यता से प्राप्त नहीं हुए हैं?
(a) शेर (b)  घोड़ा
(c)  गाय (d)  हाथी

7. किस स्थान से हड़प्पा सभ्यता से सम्बन्धित पक्की मिट्टी का हल मिला है?
(a) बनावली (b) नागेश्वर 
(c) लोथल (d) कोटदीजी

8. कुंडग्राम का, जहाँ महावीर का जन्म हुआ था, आधुनिक नाम क्या है?
(a) वैशाली (b)पटना
(c) बासुकुंड (d) पैठण

9. महाबलीपुरम का सप्तरथ मंदिर बनवाया गया था –
(a) महेन्द्र वर्मन प्रथम द्वारा
(b) नरिंसह वर्मन प्रथम द्वारा
(c) परमेश्वर वर्मन द्वारा
(d) नन्दी वर्मन द्वारा

10. निम्न में से किसने कहा कि उसे ‘शरा’ की चिन्ता नहीं है?
(a) बलबन (b) वैâकुबाद
(c) गयासुद्दीन तुगलक (d) अलाउद्दीन खिलजी



उत्तर-


1. (A) ओजोन परत में छिद्र के लिए मुख्यत: क्लोरोफ्लोरो कार्बन उत्तरदायी है। इसके अतिरिक्त मेथेन, जलवाष्प भी उत्तरदायी गैसे हैं।
इन क्लोरोफ्लोरो कार्बन का उपयोग रेफ्रिजरेटर तथा वातानुकूलन मशीनों में शीतलक के रूप में तथा अन्य कार्यों में किया जाता है। ण्इण् के उत्सर्जन एवं उनके वायुमण्डल में पहुँचने के कारण समतापमण्डलीय ओजोन गैस तथा परत का क्षय प्रारम्भ हो जाता है, जिसके कारण ओजोन छिद्र का निर्माण होता है। ओजोन छिद्र का निर्माण मानव स्वास्थ्य के लिए घातक होता है।

2. (C) मछलियों में श्वसन `गिल्स’ (गलफडो) के द्वारा होता है जबकि मनुष्यों एवं अन्य स्तनधारियों में फेफड़े द्वारा श्वसन किया जाता है।

3. (C) डायनासोर पृथ्वी से करीब 6.5 करोड़ साल पहले विलुप्त हो गए थे। मेसोजोइक युग 180 मिलियन साल तक चला और तीन अवधियों, ट्रायसिक, जुरासिक और क्रिटेशियस में बांटा गया है। इन अवधियों मेंं से प्रत्येक के कई युगों और उम्र में बांटा गया है। मेसोजोइक का अर्थ है ‘‘मध्य पशु’’ और इसे सरीसृपों और ‘डायनासोर का स्वर्ण युग’ कहा जाता है।

4. (A) पसीने का मुख्य उपयोग शरीर के ताप को नियन्त्रित त रखने में होता है। गर्मी के मौसम में पसीना ज्यादा आता है, जबकि ठण्ड के मौसम में पसीना नहीं निकलता। 

5. (B) `परितृप्ति' एवं `प्यास' के केंद्र मानव मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस भाग में अवस्थित है। हाइपोथैलेमस अन्त:स्रावी ग्रन्थियों से स्रावित हार्मोन्स का नियंत्रण करते हैं। अग्रमस्तिष्क, सेरीब्रम व डाइएनसिफेलॉन में बंटा है। सेरीब्रम चेतना शक्ति, बुद्धिमत्ता तथा स्मरण शक्ति का केंद्र है।

6. (A) सिन्धु सभ्यता के लोग शेर से परिचित नहीं थे। सिन्धु घाटी क्षेत्र में कूबड़दार और कूबड़रहित साँड़, भैंस, हाथी और कुत्ता, बिल्ली, गधे, ऊँट तथा घोड़े की अस्थियाँ मिली हैं। भेंड़, बकरी, सुअर और गाय आदि के भी अवशेष मिले हैं। सुरकोटदा से घोड़े के अस्थि पंजर के अवशेष मिले हैं। 

7. (A) हड़प्पा सभ्यता से सम्बन्धित पक्की मिट्टी का हल बनावली से प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त लोथल से जहाज गोदी, नागेश्वर से कब्रिस्तान तथा कोटदीजी के प्राक् सैंधव बस्ती में भी किलेबंदी के साक्ष्य प्राप्त होते हैं।

8. (C) महावीर का जन्म 540 ई.पू. के लगभग वैशाली के निकट कुण्डग्राम में हुआ। कुण्डग्राम का आधुनिक नाम वासुकुण्ड है। उनके पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक क्षत्रियों के संघ के प्रधान थे। उनकी माता त्रिशला या विदेह दत्ता वैशाली के लिच्छवि कुल के प्रमुख चेटक की बहन थीं। महावीर के बचपन का नाम वद्र्धमान था।

9. (B) महाबलीपुरम् के सप्तरथ मंदिर का निर्माण नरिंसह वर्मन प्रथम द्वारा करवाया गया था। जिन्हें मामल्ल भी कहा जाता है। महाबलीपुरम् के एकाश्मक रथों का निर्माण भी नरसिंह वर्मन प्रथम के द्वारा करवाया गया था। रथ मंदिरों में धर्मराज रथ, अर्जुन रथ, भीमरथ, नकुल रथ, सहदेव रथ, द्रोपदी रथ प्रमुख थे। सबसे बड़ा धर्मराज रथ तथा सबसे छोटा द्रौपदी रथ है। महेन्द्र वर्मन प्रथम (600-630 ई.) ने मत्तविलास प्रहसन नामक परिहास नाटक की रचना  भी की।

10. (D) दिल्ली सल्तनत काल में अलाउद्दीन खिलजी पहला शासक था जिसने धर्म को राजनीति से अलग रखा और उलेमाओं की इच्छाओं का पालन नहीं किया। अलाउद्दीन की लौकिक शक्ति ने धार्मिक शक्ति को पूर्णत: आच्छादित भी किया। अलाउद्दीन ने यह अनुभव किया कि राजनीतिक आवश्यकताएँ धार्मिक सहिष्णुता की माँग करती हैं और एक अस्थिर बुद्धि व धर्मान्ध शासक की अपेक्षा एक शक्तिशाली शासक की आवश्यकता को अधिक महसूस करती है। अलाउद्दीन जब गद्दी पर बैठा तो उसने यह विचार प्रकट किया कि राजनीति तथा धर्म बिल्कुल ही भिन्न तथा विपरीत क्षेत्र है। धर्म और धार्मिक आदेशों का राजनीति से कोई सम्बन्ध नहीं है और राजनीति के कानून स्वयं अपने आप में कानून है एवं उन पर धार्मिक कानून का कोई दबाव नहीं होना चाहिए। वह केवल जनहित को अपना कर्तव्य मानता था। धार्मिक कानूनों के पालन को नहीं। उसने काजी मुगीसुद्दीन से कहा था कि वह इस बात की चिन्ता नहीं करता कि कोई नियम शरियत सम्मत है या नहीं, मैं वही चाहता हूँ जिसे राज्य के हित में उचित समझता हूँ।

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