- सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 'यूथ इन इंडिया 2022' रिपोर्ट जारी की है, जिससे पता चलता है कि युवाओं की जनसंख्या में गिरावट आ रही है, जबकि 2021-2036 के दौरान बुजुर्गों की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
- प्रजनन क्षमता में निरंतर गिरावट के कारण कामकाजी उम्र (25 से 64 वर्ष के बीच) की जनसंख्या में वृद्धि हुई है, जिससे प्रति व्यक्ति त्वरित आर्थिक विकास का अवसर पैदा हुआ है।
- आयु वितरण में यह बदलाव त्वरित आर्थिक विकास के लिये एक समयबद्ध अवसर प्रदान करता है जिसे "जनसांख्यिकीय लाभांश" के रूप में जाना जाता है।
- युवा आबादी में गिरावट: वर्ष 2011-2036 की अवधि के शुरुआत में युवा आबादी में वृद्धि हुई है, लेकिन उतरार्द्ध में गिरावट शुरू हो गई है।
- वर्ष 1991 में कुल युवा आबादी 222.7 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2011 में 333.4 मिलियन हो गई और वर्ष 2021 तक 371.4 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है और उसके बाद वर्ष 2036 तक घटकर 345.5 मिलियन हो जाएगी।
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