- हर वर्ष 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं की कृषि, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
- वर्ष 2026 में दुनिया के कई हिस्सों से मधुमक्खियों की घटती संख्या, कॉलोनी नुकसान, जलवायु परिवर्तन और कीटनाशकों के प्रभाव को लेकर गंभीर रिपोर्टें सामने आई हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परागणकर्ताओं की सुरक्षा नहीं की गई तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
- मधुमक्खियां दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण परागणकर्ताओं में शामिल हैं। वे फूलों वाले पौधों और खाद्य फसलों के परागण में अहम भूमिका निभाती हैं।
- अनुमान है कि लगभग 90 प्रतिशत जंगली फूलों वाली पौध प्रजातियां परागणकर्ताओं पर निर्भर करती हैं, जबकि दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत खाद्य फसलें उत्पादन और गुणवत्ता के लिए परागण पर निर्भर हैं।
- परागण की प्रक्रिया केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। मधुमक्खियों की कमी से फलों, सब्जियों और बीजों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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