भारतीय मूल की छात्रा ने झींगा खोल और रेशम से तैयार किया पर्यावरण-अनुकूल प्लास्टिक

  • प्लास्टिक प्रदूषण आज दुनिया की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं में से एक बन चुका है। इसी चुनौती के बीच भारतीय मूल की ऑस्ट्रेलियाई छात्रा एंजेलिना अरोड़ा ने एक ऐसा नवाचार किया है, जिसने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। 
  • वर्ष 2018 में उन्होंने झींगा (प्रॉन) के खोल और रेशम के कोकून का उपयोग करके एक अनोखा जैव-विघटनीय प्लास्टिक तैयार किया, जो लगभग 33 दिनों के भीतर प्राकृतिक रूप से पूरी तरह समाप्त हो जाता है। 
  • यह खोज पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में पर्यावरण के लिए एक आशाजनक समाधान मानी जा रही है।
  • इस तकनीक के पीछे काइटिन नामक प्राकृतिक बहुलक का उपयोग किया गया है, जो झींगा सहित अन्य क्रस्टेशियनों के बाहरी कवच, कीटों के बाह्य कंकाल और कवकों की कोशिका भित्तियों में पाया जाता है।
  •  काइटिन को संसाधित कर काइटोसान में बदला जाता है, जिसका उपयोग पहले से ही चिकित्सा, कृषि और पैकेजिंग जैसे कई क्षेत्रों में किया जाता रहा है।
  • इसके बाद काइटोसान को रेशम के कोकून में मौजूद प्रोटीन फाइब्रोइन के साथ मिलाया गया।
  •  इस संयोजन से एक ऐसा नया पदार्थ विकसित हुआ, जो न केवल मजबूत और पारदर्शी है, बल्कि टिकाऊ भी है और साथ ही पूरी तरह जैव-विघटनीय भी है।
  •  यह नवाचार भविष्य में प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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