ISRO और परमाणु ऊर्जा विभाग विकसित कर रहे हैं नया चंद्र लैंडर

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) संयुक्त रूप से एक उन्नत चंद्र लैंडर विकसित कर रहे हैं, जिसे वर्ष 2026 के बाद के चंद्र अभियानों में उपयोग करने की योजना है। 
  • इस नए लैंडर का उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर लंबी अवधि तक कार्य करने की क्षमता विकसित करना है।
  • चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा पर लगभग 14 दिनों तक सफलतापूर्वक कार्य किया था, जबकि नई तकनीक से विकसित किया जा रहा लैंडर 100 से 200 दिनों तक सक्रिय रह सकेगा। 
  • यह परियोजना भारत के ‘स्पेस विजन 2047’ तथा दीर्घकालिक चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • चंद्रमा पर एक दिन और एक रात की अवधि लगभग 14-14 पृथ्वी दिनों के बराबर होती है। 
  • इसलिए वहां लंबे समय तक सूर्य का प्रकाश और उसके बाद लंबी अंधेरी रात बनी रहती है। 
  • चंद्र रात्रि के दौरान तापमान माइनस 100 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है, जिससे अंतरिक्ष यानों की बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और वैज्ञानिक उपकरणों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • इन कठिन परिस्थितियों में भी लंबे समय तक कार्य करने में सक्षम लैंडर का विकास भारत की अंतरिक्ष तकनीक में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है और भविष्य के चंद्र अभियानों को नई दिशा प्रदान करेगा।

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