- तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गांव में स्थित ऐतिहासिक गोल्लालागुडी मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है।
- संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय की ओर से 1 सितंबर 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के बाद मंदिर को भारत की संरक्षित धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है।
- इसके साथ ही तेलंगाना में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में आने वाले स्मारकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
- गोल्लालागुडी मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता है। इसे त्रिकुटालय शैली का मंदिर माना जाता है, जिसमें तीन गर्भगृह होते हैं। मंदिर का पूर्वमुखी मंडप इन तीनों गर्भगृहों से जुड़ा हुआ है।
- यह विशेषता काकतीय काल की मंदिर निर्माण परंपरा की प्रमुख पहचान मानी जाती है।
- इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, मंदिर का संबंध व्यापक रूप से 12वीं से 13वीं शताब्दी के काकतीय काल से माना जाता है।
- हालांकि, इसके निर्माण की सटीक तिथि और मूल रूप से किस देवता को समर्पित था, इसे लेकर अभी भी पुरातात्त्विक और अभिलेखीय शोध जारी है।
- ऐसे में गोल्लालागुडी मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक अध्ययन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण स्थल बन जाता है।
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