ग्रीन टेक्नोलॉजी में सऊदी अरब की बड़ी उपलब्धि

  • सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए ऐसा कूलिंग सिस्टम विकसित किया है, जो बिना बिजली के ठंडक प्रदान कर सकता है। 
  • यह अभिनव तकनीक किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAUST) के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गई है। 
  • इस नई प्रणाली को “नेस्कोड” नाम दिया गया है, जिसका अर्थ है — नो इलेक्ट्रिसिटी एंड सस्टेनेबल कूलिंग ऑन डिमांड
  • यह तकनीक पारंपरिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम से पूरी तरह अलग है, क्योंकि इसमें कंप्रेसर या निरंतर बिजली आपूर्ति की आवश्यकता नहीं पड़ती। 
  • नेस्कोड रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से ठंडक उत्पन्न करता है, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल विकल्प बन जाता है।
  • यह प्रणाली “एंडोथर्मिक डिसोल्यूशन” सिद्धांत पर कार्य करती है। इस प्रक्रिया में कुछ पदार्थ पानी में घुलते समय आसपास की गर्मी को अवशोषित कर लेते हैं, जिससे तापमान कम हो जाता है। 
  • नेस्कोड में अमोनियम नाइट्रेट को पानी में मिलाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप तेजी से ठंडक पैदा होती है।
  • सिस्टम की एक और खासियत यह है कि इसमें सौर ऊर्जा की मदद से पानी को वाष्पित किया जाता है और उपयोग किए गए नमक को पुनः तैयार कर दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाया जाता है। 
  • इसी वजह से यह तकनीक बार-बार ठंडक उत्पन्न करने में सक्षम है और अतिरिक्त ऊर्जा खर्च भी नहीं करती।
  •  विशेषज्ञों के अनुसार, यह आविष्कार भविष्य में ऊर्जा संकट और बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए एक प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।

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