- भारत सरकार ने 15 जून 2026 को देश की मूल्य-सूचकांक प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़े जारी किए।
- इसके साथ ही थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की नई श्रृंखला भी पेश की गई, जिसका आधार वर्ष 2022-23 निर्धारित किया गया है।
- सरकार ने घोषणा की है कि अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से वर्तमान डब्ल्यूपीआई आधारित व्यवस्था को पीपीआई आधारित प्रणाली में परिवर्तित किया जाएगा।
- यह पहल भारत की मुद्रास्फीति मापन प्रक्रिया को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
- प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादक स्तर पर होने वाले मूल्य परिवर्तनों को मापता है, जबकि डब्ल्यूपीआई मुख्य रूप से थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव को दर्शाता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, पीपीआई आधारित व्यवस्था उत्पादन लागत और मूल्य प्रवृत्तियों का अधिक सटीक आकलन करने में सहायक होगी।
- नई डब्ल्यूपीआई श्रृंखला और पीपीआई के समावेश से सरकार को महंगाई की स्थिति का बेहतर विश्लेषण करने, आर्थिक नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप डेटा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
- यह बदलाव भारत की आर्थिक सांख्यिकी प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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