भारतीय वायुसेना के बेड़े को मजबूती देंगे ब्रिटेन से आने वाले जगुआर विमान


  • भारतीय वायुसेना अपने जगुआर लड़ाकू विमानों के संचालन और रखरखाव को सुचारु बनाए रखने के लिए वर्ष 2026 में यूनाइटेड किंगडम से नौ सेवानिवृत्त SEPECAT Jaguar विमान हासिल करेगी। 
  • इन विमानों को उड़ान अभियानों में शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि इनमें मौजूद उपयोगी पुर्जों और प्रणालियों का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना के मौजूदा जगुआर बेड़े की मरम्मत और रखरखाव के लिए किया जाएगा। विमानन क्षेत्र में इस प्रक्रिया को "कैनिबलाइजेशन" कहा जाता है।
  • यह कदम उन जगुआर विमानों की परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो दशकों से भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक शक्ति का अहम हिस्सा रहे हैं। आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता बढ़ने से इन विमानों की सेवा अवधि को और प्रभावी ढंग से बढ़ाया जा सकेगा।
  • वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 115 से 120 जगुआर विमान हैं, जिनके 2030 से 2032 तक सेवा में बने रहने की संभावना है। 
  • इनकी छह स्क्वाड्रन प्रमुख वायुसेना अड्डों पर तैनात हैं और वे सामरिक हमलों, जमीनी लक्ष्यों पर सटीक प्रहार तथा विभिन्न स्ट्राइक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • हालांकि जगुआर विमानों को सेवा में आए कई दशक हो चुके हैं, फिर भी वे भारतीय वायुसेना की आक्रामक क्षमताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।
  •  ऐसे में ब्रिटेन से मिलने वाले सेवानिवृत्त विमानों के पुर्जे इनके संचालन को लंबे समय तक बनाए रखने में उपयोगी साबित होंगे।

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