सिंगापुर में न्यूरॉन्स आधारित बायोलॉजिकल डेटा सेंटर की शुरुआत

  • सिंगापुर में कंप्यूटिंग तकनीक को एक नई दिशा देने वाला प्रयोग सामने आया है। 
  • यहां वैज्ञानिकों ने जीवित मानव न्यूरॉन्स को सिलिकॉन आधारित हार्डवेयर के साथ जोड़कर एक बायोलॉजिकल डेटा सेंटर का प्रोटोटाइप तैयार किया है।
  •  इस प्रोजेक्ट को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज में पेश किया गया है।
  • इस तकनीक को बायोलॉजिकल कंप्यूटिंग का हिस्सा माना जाता है। 
  • इसमें पारंपरिक सिलिकॉन चिप्स के बजाय या उनके साथ जीवित कोशिकाओं, जैविक अणुओं और अन्य जैविक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करके गणना और डेटा प्रोसेसिंग की संभावनाएं तलाश की जाती हैं। 
  • जैविक और इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के इस मेल को ‘वेटवेयर’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • प्रोटोटाइप में स्टेम सेल से तैयार किए गए मानव न्यूरॉन्स को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जोड़ा गया है।
  •  इसका उद्देश्य यह समझना है कि जीवित न्यूरॉन्स और सिलिकॉन हार्डवेयर मिलकर किस तरह सूचना को प्रोसेस कर सकते हैं।
  • यह प्रयोग भविष्य की ऐसी कंप्यूटिंग प्रणालियों की दिशा में कदम माना जा रहा है, जो मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से प्रेरणा लेकर अधिक जैविक और अनुकूल तकनीक विकसित करने की कोशिश करती हैं।

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